आस्था एवं अंधविश्वास में क्या अंतर है?

 

आस्था एवं अंधविश्वास में क्या अंतर है?

आस्था एवं अंधविश्वास में क्या अंतर है?
- भारत में कई अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं और उनका अलग-अलग धर्मों में और उनके धर्म ग्रंथों में लिखी गई बातों पर आस्था रखती है। यदि भारत में हिंदू धर्म की बात करें तो इसमें कई भगवान हैं और अलग-अलग हिंदू लोगों का अलग अलग भगवानों में आस्था है। भारत में आस्था के नाम पर अंधविश्वास भी काफी अधिक है। कम पढ़े लिखे लोग अंधविश्वासी हो कर किसी भी बात पर विश्वास करने लगते हैं और इससे उन्हें काफी नुकसान भी हो जाता है। इसीलिए आपको आस्था एवं अंधविश्वास में अंतर समझना जरूरी है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे की आस्था एवं अंधविश्वास में क्या अंतर है?

भारत में कई सारे लोगों ने काफी अंधविश्वास फैला रखा है जिसके शिकार कम पढ़े लिखे लोग सबसे अधिक होते हैं। भारत में बहुत सारे तांत्रिक एवं मौलवी आस्था के नाम पर अंधविश्वास फैलाते हैं और भोले भाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसमें कई लोग यह कहते हैं कि पेड़ छूने से रोग समाप्त होगा और गंगा स्नान करने से सभी पाप दूर हो जाएंगे। लेकिन यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर पाप करता है और गंगा स्नान कर देता है तो क्या उसके भी पाप धुल जाएंगे? यह सवाल ही आस्था एवं अंधविश्वास के बीच का अंतर है।

हालांकि यह टॉपिक कई लोगों को काफी बुरा भी लग सकता है लेकिन यह कड़वी सच्चाई है कि कई लोग आस्था के नाम पर अंधविश्वास फैलाते हैं और कई कम पढ़े लिखे एवं अच्छे खासे पढ़े-लिखे लोग भी उसका शिकार बन जाते हैं। यदि आप गंगा में आस्था रखते हैं तो यह भी समझना जरूरी है कि जानबूझकर पाप करने वाले व्यक्ति के पाप उसमें नहीं तोड़ सकते हैं।

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यदि गंगा में स्नान करने से पाप धुलता है तो सिर्फ उसी व्यक्ति का पाप धुल सकता है, जिसने अनजाने में कोई पाप किया हो। ऐसा नहीं कि दिन भर पाप करने वाला व्यक्ति शाम को जाकर गंगा स्नान कर ले और पाप से मुक्त हो जाए। यदि ऐसा होने लगे तो भारत में सभी लोग पाप मुक्त हो जाएं। इसीलिए अब हम आपको आस्था एवं अंधविश्वास के बीच का अंतर समझाएंगे।

आस्था एवं अंधविश्वास में क्या अंतर है?

1. आस्था हृदय की गहराई से जुड़ा होता है और अंधविश्वास बहुमत प्रधान होता है

आस्था किसी भी ईश्वर या किसी धर्म के लिए हृदय से जुड़ी होती है। यदि हमें किसी ईश्वर या धर्म के प्रति आस्था है तो इसके लिए हमें कोई भी व्यक्ति प्रोत्साहित या हतोत्साहित नहीं कर सकता है। लेकिन अंधविश्वास अक्सर बहुमत प्रधान होता है और हमें उसके बारे में इतनी बार बता दिया जाता है कि उस पर विश्वास करना पड़ जाता है।

अक्सर बहुत सारे लोग अंधविश्वास पर काफी भरोसा करने लगते हैं। जैसे किसी महिला का बच्चा नहीं पैदा हो रहा तो किसी मौलवी या बाबा के पास जाने पर वह आशीर्वाद देंगे और बच्चा पैदा हो जाएगा। यदि मेडिकल साइंस में किसी कमी को बताया जा रहा है तो आखिर कोई मौलवी या बाबा उसके बाँझपन को कैसे समाप्त कर सकता है। लेकिन बच्चे की आस मन में रखे मां को मजबूरन अंधविश्वास पर भरोसा करना पड़ जाता है।

2. अंधविश्वास एक मनगढ़ंत धारणा है जबकि आस्था एक पवित्र धारणा है

अंधविश्वास एक मनगढंत धारणा होती है और इसीलिए अंधविश्वास का काफी बड़े स्तर पर प्रचार भी किया जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि अंधविश्वास फैलाने वाले व्यक्ति पंपलेट छपवा कर उसका प्रचार करते हैं। आपने अक्सर ऐसे पर्ची देखे होंगे जिसमें यह लिखा होता है कि इस पर्चे को 1000 लोगों को छपवा कर देने से आपके घर में खुशी आएगी। जबकि आस्था एक पवित्र धारणा है। यदि आप ईश्वर में अपनी आस्था रखते हैं तो आप हमेशा यह सोचेंगे कि ईश्वर जो कर रहा है वह अच्छे के लिए कर रहा है। यदि वह बुरा भी कर रहा है तो इसका मतलब यह है कि वह हमारी परीक्षा ले रहा है।

3. अंधविश्वास अहित कर सकता है लेकिन आस्था नहीं

अंधविश्वास में अक्सर लोगों का अहित हो सकता है लेकिन यदि आप आस्था रखते हैं तो इस यह सदैव हितकारी होता है। यदि आपका ईश्वर के प्रति आस्था है तो वह हमेशा हितकारी रहेगा। लेकिन यदि आप अंधविश्वास के साथ रहेंगे तो हमेशा आपके साथ अहित ही होगा।

4. अंधविश्वास विरोधी हो सकता है लेकिन आस्था नहीं

बहुत सारे लोग अंधविश्वास को मानते हैं और इस अंधविश्वास में विरोध ही छुपा होता है। आपने अक्सर सुना होगा कि किसी दिन किसी विशेष रंग के कपड़े पहनने पर आपको लाभ प्राप्त होगा और अगले दिन किसी दूसरे रंग के कपड़े पहने पर आपको लाभ प्राप्त होगा। लेकिन यदि आप आस्था रखते हैं तो आपको अलग-अलग रंगों के कपड़े पहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आप जिस भी कपड़े को पहनेंगे वह आपके लिए लाभ ही लेकर आएगी। 

5. अंधविश्वास नकारात्मकता फैलाती है जबकि आस्था सदैव सकारात्मक होती है

यदि आप अंधविश्वास को मानते हैं तो इसका मतलब यह है कि आपके अंदर नकारात्मक विचार काफी अधिक है। लेकिन यदि आप किसी शक्ति में आस्था रखते हैं तो आप उसके प्रति हमेशा सकारात्मक विचार रखते हैं। आस्था शब्द का आशय सिर्फ किसी ईश्वर या धर्म में आस्था रखना नहीं है, बल्कि आप अपने माता-पिता, गुरु एवं किसी विशेष व्यक्ति पर आस्था रख सकते हैं। यदि आप किसी के प्रति आस्था रखते हैं तो हमेशा उसके बारे में सकारात्मक सोच रखते हैं। लेकिन यदि आप अंधविश्वास का अनुसरण करते हैं तो आप किसी व्यक्ति के बारे में, किसी रंग के बारे में या किसी जगह के बारे में हमेशा नकारात्मक सोचेंगे।


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