साईकिल पंचर बनाने वाला वरुन बरनवाल बना IAS अफसर Success Story

साईकिल पंचर बनाने वाला वरुन बरनवाल बना IAS अफसर (SUCCESS STORY):-

साईकिल पंचर बनाने वाला वरुन बरनवाल बना IAS अफसर Success Story
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Varun Baranwal Ias Success Story In Hindi :-


महाराष्ट्र के एक छोटे से परिवार का लड़का साईकिल का पंचर बनाते-बनाते बना IAS अधिकारी, उस लड़के का नाम वरुन बरनवाल है वरुन ने कड़ी मेहनत करके अपना और अपने परिवार की तकदीर बदल दी जो युवाओ के लिए प्रेरणा स्रोत है

वरुन बरनवाल महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर  बोइसार के रहने वाले हैं वह एक बेहद गरीब परिवार में जन्मे लेकिन वह शुरू से ही होनहार छात्र थे उन्होंने गरीबी बहुत करीब से देखा और जब वे छोटे थे तब उनके पिता साइकिल पंचर की दुकान चलाते थे और उसी से अपने घर का खर्चा चलाते थे लेकिन इन सब के बावजूद इनके माता-पिता ने इन्हें पढ़ाना जारी रखा दसवीं के एग्जाम के समय इनके पिताजी बीमार हो गए वरुन ने पूरी परीक्षा के दौरान अपने पिताजी की देखभाल के साथ अपने एग्जाम की तैयारी भी की । 21 मार्च 2006 को उनकी 10वीं की परीक्षा खत्म हुई और 24 मार्च को पिताजी की मृत्यु हो गई ।

पांच भाई-बहनों में वरुण सबसे बड़े बेटे थे इसलिए पिता की मृत्यु के बाद घर का खर्चा चलाने की पूरी जिम्मेदारी वरुण बरनवाल पर ही था कुछ समय बाद दसवीं का रिजल्ट आया और वरुन ने पूरे शहर में दूसरा स्थान हासिल किया लेकिन उसके बाद वरूण ने पढ़ाई छोड़ कर घर चलाने के लिए काम करने की सूची लेकिन जब घर गया तो उनकी मां ने कहा तू पढ़ाई कर और दुकान मैं संभाल लूंगी । पूरे परिवार ने मेरा हौसला बढ़ाया और आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए कहा लेकिन आगे की पढ़ाई का खर्चा ₹10000 था इसलिए पढ़ाई छोड़कर वरुन दुकान पर काम करने लगा एक दिन जब पर दुकान पर काम कर रहा था तब एक पिताजी के जानने वाले डॉक्टर कम्पली ने वरुन को देखा और पूछा तुम यहाँ क्या कर रहे हो वरुन की परेशानी जानने के बाद उन्होंने कहा तुम एडमिशन लो और फीस मैं दूंगा उसके बाद वरुन पढ़ाई के साथ-साथ दुकान पर भी काम करते थे पूरे दिन में काम के बीच में जब भी समय मिलता था वह अपनी किताब पढ़ते थे

साल 2008 में वरुण ने 12वीं कक्षा पास की अब इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तब उनके जानने वाले सुकुमार भैया और कुछ लोगों ने पैसा इकट्ठा करके एमआईटी कॉलेज पुणे में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन ब्रांच में एडमिशन लिया इस बीच टर्म  एग्जाम में टॉप किया जिससे आगे की पढ़ाई में छात्रवृत्ति मिल सके । पढ़ाई के दौरान ट्यूशन भी पढ़ाते थे इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान फीस देने के लिए कुछ दोस्तों और अध्यापको ने भी मदद की । पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें MNC कंपनी का जॉब ऑफर भी मिला लेकिन उन्होंने प्राइवेट जॉब करके अपनी प्रॉब्लम सॉल्व करना नहीं था बल्कि सामाजिक समस्याओं को दूर करने की ठानी । जॉब न करने के वजह उनकी माँ नाराज हो गई और कुछ समय तक बात भी नहीं किया । उसके बाद वरुन ने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू की और 2014 में यूपीएससी के एग्जाम में 32वीं रैंक आया तब उनकी मां बहुत खुश हुई ।


वरुन बरनवाल ने यह सफलता मात्र 23 साल की उम्र में हासिल की ।

इस तरह से वरुन ने यह साबित कर दिया की कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से कोई भी सफलता पा सकता है  


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